तकनीकी हस्तांतरण

अनेक विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान द्वारा प्रौद्योगिकी का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

आवश्यकता आधारित कम्प्यूटर कार्यक्रमों का विकास
चावल, मक्का, गेहूँ, तिलहनों, दलहनों, एवं मडुंवा की फसलों के आनुवांशिक संग्रह डाटावेस विकसित किए गए । इस प्रणाली में तीन मुख्य माडयूल नामतः डाटा इन्ट्री, क्वैरी एवं रिपोर्ट जनरेशन सम्मिलित थे।

फार्म परामर्श सेवा
कृषक हेल्पलाइन सेवा (1800-180-2311) के माध्यम से नियमित तौर पर फार्म परामर्श सेवा प्रदान कराई गई। प्रतिवेदित अवधि के दौरान पंजीकृत 435 कॉल्स के विषय-वस्तु विश्लेषण में 27 प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित हुई।

पर्वतीय कृषिरत महिलाओं की कठिन श्रम संबंधी गतिविधियों तथा पोषण स्थिति का आँकलन
चारा काटने वाले कार्यकलापों का मूल्यांकन भागीदारी शरीरक्रियाविज्ञान एवं मैद्रिक इरगोनोमिक तकनीकों के आधार पर किया गया। अध्ययन के तहत यह पाया गया कि चारा काटते समय ह्दय गति में हुई प्रतिशत वृद्धि 8.78 थी। कार्य की ह्दय संबंधी लागत (टी सी सी डब्ल्यू) तथा कार्य की शरीरक्रियाविज्ञान लागत (पी सी डब्ल्यू) चार काटते समय कहीं अधिक क्रमशः 2017.5 धड़कन प्रति मिनट और 134.5 धड़कन प्रति मिनट पाई गई। अन्य शरीरक्रियाविज्ञान प्राचलों, जैसे कि ऊर्जा व्यय दर (ई ई आर), रक्त दबाव तथा नाड़ी स्पंदन दर में वृद्धि प्रतिशत देखी गई जो कि क्रमशः 41.43 (KJ/मिनट), 14.23 (mmHg), 40.86 (प्रति मिनट) के स्तर तक ज्यादा थी। रक्त में लेक्टेट सांद्रता (कार्य के उपरांत) का स्तर भी 2.58 mmol/ लीटर रक्त के निर्धारित स्तर की तुलना में कहीं ज्यादा पाया गया (7.94 mmol/लीटर रक्त तक )।

पर्वतीय कृषिरत महिलाओं का पोषण स्तर
उत्तराखण्ड के कम, मध्यम तथा अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों की कृषिरत महिलाओं में पोषण अंतर्ग्रहण प्रवृति से प्रदर्शित हुआ कि इन महिलाओं में संस्तुत आहारीय भत्ता (आर डी ए) (आई सी एम आर, 2010) की तुलना में ऊर्जा, प्रोटीन तथा बीटा कैरोटिन की औसत खपत कम थी। (बी एम आई) की गणना करके महिलाओं में कुपोषण की सीमा का आँकलन किया गया और 45 प्रतिशत महिलाओं में स्थाई अथवा चिरकालिक ऊर्जा अल्पता और 22.5 प्रतिशत में अल्प से सामान्य स्थिति पाई गई। केवल 30 प्रतिशत महिलाएं ही सामान्य स्वास्थ्य स्थिति में पाई गई।